आचार्य सुधीश दुबे जी एक अनुभवी एवं श्रद्धेय भागवत कथा वाचक हैं, जो श्रीमद्भागवत महापुराण के माध्यम से श्रीकृष्ण भक्ति, धर्म और जीवन मूल्यों का प्रचार-प्रसार कर रहे हैं। वे वर्षों से देश के विभिन्न स्थानों पर भागवत कथा का आयोजन कर भक्तों को आध्यात्मिक रस से अभिसिंचित करते आ रहे हैं।
आचार्य जी की कथा शैली सरल, भावपूर्ण एवं शास्त्रसम्मत है। वे श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं, भक्त प्रह्लाद, ध्रुव, गोपियों एवं संत परंपरा के उदाहरणों के माध्यम से जीवन के गूढ़ सत्य को सहज भाषा में प्रस्तुत करते हैं, जिससे हर वर्ग के श्रोता कथा से गहराई से जुड़ पाते हैं।
वे मानते हैं कि भागवत कथा केवल श्रवण का विषय नहीं, बल्कि जीवन को धर्म, भक्ति और सदाचार की दिशा में परिवर्तित करने का साधन है। उनकी कथाओं में भक्ति के साथ-साथ प्रेम, करुणा, संयम और मानव कल्याण का संदेश स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता है।
आचार्य सुधीश दुबे जी के श्रीमुख से भागवत कथा श्रवण करना भक्तों के लिए एक दिव्य एवं आत्मिक अनुभव होता है, जो मन को शांति और हृदय को श्रीकृष्ण भक्ति से भर देता है।
स वै पुंसां परो धर्मो यतो भक्तिरधोक्षजे।
अहैतुक्यप्रतीहता यया आत्मा सुप्रसीदति॥
मनुष्यों के लिए वही धर्म सर्वोत्तम है,
जिससे भगवान श्रीकृष्ण में निष्काम और अविच्छिन्न भक्ति उत्पन्न हो।
ऐसी भक्ति से ही आत्मा पूर्ण रूप से प्रसन्न होती है।